देहरादून:देहरादून जनपद के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के छह खतों में भिरुड़ी पर्व मनाया गया। लोगों ने अपने ईष्ट देव की आराधना कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद दिनभर पंचायती आंगन में हारुल और तांदी नृत्य की धूम रही। गांव के स्याणा ने ठारी (पवित्र स्थान) पर चढ़ कर अखरोट फेंके, जिन्हें लोगों ने पकड़ कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
भिरुड़ी के दिन सूने की हरियाड़ी का विशेष महत्व है। गांव का बाजगी (ढोल बजाने वाला) 21 दिन पहले जौ और गेहूं को साफ सुधरे स्थान पर बोता है। भिरुड़ी के दिन तैयार हुई हरियाड़ी ईष्ट देवताओं को अर्पित की जाती है। बाद में गांव का बाजगी इस हरियाड़ी को पंचायती आंगन में एकत्रित हुए महिला-पुरुषों के माथे पर लगाता है। लोगों ने देवता की पूजा करने के बाद एक-दूसरे को प्रसाद के रूप में चिवड़ा और अखरोट भी बांटे। जनजातीय क्षेत्र के ज्यादातर इलाकों में दिवाली के एक माह बाद बूढ़ी दिवाली का जश्न मनाया जाता है लेकिन, छह खतों में पूरे देश के साथ दिवाली का जश्न मनाया जाता है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व पर दिवाली के अगले दिन भिरुड़ी पर्व मनाया जाता है। त्यूनी, बावर, देवघार, फनार, बाणाधार, भरम खतों में यह दिवाली मनाई जाती है।
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