window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); ब्रह्मज्ञानी साधकों को शाश्वत मार्ग पर निष्ठा भाव से आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित | T-Bharat
January 29, 2026

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ब्रह्मज्ञानी साधकों को शाश्वत मार्ग पर निष्ठा भाव से आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित

देहरादून,। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रम में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन आत्मजागृति के परम उद्देश्य के लिए एक महान आध्यात्मिक समागम के रूप में संपन्न हुआ। एक जागृत शिष्य को भी गहन ध्यान, त्याग, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और आत्म-संयम जैसे सद्गुणों के साथ शिष्यत्व की बुनियादों से निरंतर जुड़ाव की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति करता यह कार्यक्रम अत्यंत विशिष्ट साबित हुआ। कार्यक्रम में संस्थान के प्रचारकगणों ने दिव्य गुरु द्वारा प्रदान की जाने वाली शाश्वत विधि ब्रह्मज्ञान के दुर्लभ महत्व को स्पष्ट किया। यह आत्मज्ञान-आधारित दिव्य विज्ञान प्राचीन शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है और व्यावहारिक जीवन में अद्भुत परिवर्तन लाने में सदा सिद्ध हुआ है। यह अनमोल और शाश्वत परिवर्तनकारी विधि, दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की कृपा से, लाखों लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाई है और उन्हें उनके जीवन के सर्वोच्च उद्देश्य के प्रति जागरूक किया है।
इस कार्यक्रम में भजन, आतंरिक आत्मावलोकन और प्रेरणादायक प्रवचनों की श्रृंखला रही, जिनसे सभी साधक सच्चे मन से पूर्ण गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए धर्मपथ पर मिल-जुलकर चलने के लिए अत्यंत प्रेरित हुए। प्रचारकगणों द्वारा शिष्य धर्म के लिए सफलता सूत्र प्रस्तुत करते हुए कहा गया। गुरु की कृपा सदा ही शिष्य की सभी संभावित कष्टों और विपत्तियों से रक्षा करती है, बशर्ते शिष्य पूर्ण समर्पण भाव से गुरुचरणों में शरण ले।
ऐसे मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम साधकों के भीतर एकता, सौहार्द्र, प्रेम और दिव्यता के मूल्यों को और अधिक दृढ़ करते हैं तथा इस धरा को स्वर्गमय बनाने की दिशा में अग्रसर करते हैं। निरंतर समर्पण, साधना और अटूट विश्वास से शिष्य अनेकों आध्यात्मिक उपलब्धियों को प्राप्त कर, अंतःचेतना की परतों को जाग्रत करता है। जो न केवल अत्यंत संतोषजनक और शांतिदायक है, बल्कि दिव्य शक्ति से परिपूर्ण भी है, जिसकी किसी भी सांसारिक या क्षणिक उपलब्धि से तुलना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम का समापन उमंग और प्रसन्नता से परिपूर्ण रहा। सामूहिक साधना कर शिष्य समाज ने वैश्विक मंगल व हित की कामना की। साथ ही, सभी ने एक परिवार के रूप में दिव्य सामुदायिक भंडारे में भी भाग लिया।

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