रुड़की,(Amit Kumar): नवसृजन साहित्यिक संस्था रुड़की द्वारा ज्योतिबा फुले सैनी धर्मशाला में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में जहाँ नगर के प्रतिष्ठित कवियों ने भाग लिया वहीं कई समाजसेवियों ने भी शिरकत करके रचनाओं का आनंद उठाया। गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था संरक्षक सुबोध पुंडीर सरित द्वारा की गई ।जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में नगर के साहित्यकार श्रीगोपाल नारसन , समाजसेवी श्याम कुमार त्यागी एवं मुल्की राज सैनी ने भाग लिया। संचालन करते हुए नीरज नैथानी ने सुबोध पुंडीर सरित का सरस्वती वंदना के लिए आव्हान किया। ओज के कवि विनीत भारद्वाज व राजकुमार सैनी ने देशभक्ति रचना सुनाई तो गोपाल शर्मा ने कन्या भ्रूण हत्या पर काव्यात्मक प्रकाश डाला । समाजसेवी विकास त्यागी ने प्रथम बार स्वरचित रचना का पाठ किया। वही धीरेंद्र कुमार सैनी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान में गीत प्रस्तुत किया। जिसके बोल हैं , “यह स्वतंत्रता सेनानी है इस देश के बुनियादी पत्थर/ इनके ही दम से फहराता है आज तिरंगा यह फर फर ” । वरिष्ठ कवि एस के सैनी द्वारा गांव की स्मृतियों से जुड़ा एक गीत प्रस्तुत किया गया, “बारिश आ कर जब इस सूखी धरती को महकाती है/ वह भीनी सी खुशबू मुझको गांव तलक ले जाती है “। शायर पंकज त्यागी असीम ने गणतंत्र से जुड़े दोहे सुनाये। संचालक नीरज नैथानी की कविता, ” जी हां मैं अखबार हूं” ने मंत्रमुग्ध कर दिया। नवीन शरण निश्चल की रचना एवं अनुपमा गुप्ता की रचनाओं को भी सराहना मिली।विशिष्ट अतिथि साहित्यकार श्रीगोपाल नारसन ने “माँ ” को समर्पित कविता सुनाई, “मां की मेहनत के बल पर
मैं हर साल पास हो जाता था
मां की नजरों में चढ़कर मैं
लाट साहब बन जाता था “
इस अवसर पर समय सिंह सैनी , भोपाल सिंह , रंजन त्यागी, रणवीर सिंह रावत, डॉक्टर संजीव सैनी ,दीपिका सैनी, श्रीमती रश्मि त्यागी, उदय वीर सिंह , पवन सिंह सैनी आदि उपस्थित रहे।
नव सृजन साहित्यिक संस्था की कवि गोष्ठी में उड़े राष्ट्रभक्ति के रंग

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