देहरादून,। भारत में स्कूल और परिवार अब ऐसी शिक्षा चाहते हैं, जो बच्चों को भारत से जोड़कर रखे और उन्हें दुनिया में आगे बढ़ने के मौके भी दे। इसी को लेकर कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एजुकेशन देहरादून के स्कूल लीडर्स के साथ चर्चा की, कि तेजी से बदलती दुनिया के हिसाब से बच्चों की पढ़ाई में क्या बदलाव किए जाने चाहिए। आजकल भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। भारतीय स्कूलों के लिए अब सवाल यह नहीं है कि भारतीय पाठ्यक्रम चुनें या अंतरराष्ट्रीय, बल्कि यह है कि बच्चों को ऐसी कौन-सी शिक्षा दी जाए, जो उन्हें भारत और दुनिया, दोनों जगह आगे बढ़ने के लिए तैयार करे।
विनय शर्मा, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, इंटरनेशनल एजुकेशन, साउथ एशिया, कैम्ब्रिज ने बताया कि आज माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले, जिससे वे पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म करने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई, नौकरी और जीवन में भी सफल हो सकें। आज टेक्नोलॉजी, एआई और दुनिया के आपस में जुड़ने के कारण नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसलिए स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को आत्मविश्वासी बनाएं, ताकि वे खुद सोच सकें, अपनी बात अच्छी तरह कह सकें, असली जीवन की समस्याओं को हल कर सकें और बदलते समय के साथ खुद को ढाल सकें। आज अच्छे यूनिवर्सिटीज और कंपनियां भी इन स्किल्स को बहुत महत्व देती हैं। चर्चा में इन मुख्य बातों पर जोर दिया गयारू भारत में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा में बढ़ती रुचि। भारतीय छात्रों और परिवारों की बदलती उम्मीदें। पढ़ाई में वैश्विक स्तर बनाए रखते हुए उसे भारतीय जरूरतों से जोड़ना। छात्रों को भारत और विदेशों में आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करना। छात्रों में सही सोच, खुद फैसले लेने और समस्याओं को हल करने की क्षमता बढ़ाना। पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य के करियर पर एआई के असर को समझना। छात्रों को अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग पढ़ाई और करियर के रास्ते चुनने की आजादी देना स्कूलों की पाठ्यक्रम और परीक्षा से जुड़ी स्कूलों से बढ़ती उम्मीदें।
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