window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता के वैज्ञानिक आकलन पर दिया जा रहा विशेष ध्यान | T-Bharat
October 9, 2026

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हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता के वैज्ञानिक आकलन पर दिया जा रहा विशेष ध्यान

हल्द्वानी,। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और समय के साथ विकास की जरूरतें तथा चुनौतियां भी बदलती रहती हैं। राज्य गठन के समय लगभग 4 हजार करोड़ से शुरू हुआ उत्तराखण्ड का बजट आज लगभग 1.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड तेजी से प्रमुख पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। राज्य में होम-स्टे की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग 41 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखण्ड और केरल संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे।
उन्होंने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य की मातृशक्ति सीमित संसाधनों में उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रही है। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 5 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया। अनियमितताओं में शामिल 100 से अधिक लोगों के विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को उत्तराखण्ड के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी तथा सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास केवल बड़ी परियोजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। विकास की यात्रा में उत्तराखण्ड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा एवं प्रताप बिष्ट, महापौर हल्द्वानी-काठगोदाम गजराज सिंह बिष्ट, महापौर काशीपुर दीपक बाली, वरिष्ठ पत्रकार विजय सिंह यादव, विष्णु त्रिपाठी, मनोज झा, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी.सी. सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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