window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); लखनऊ विश्वविद्यालय के एम.एड विद्यार्थियों ने जाना भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व | T-Bharat
June 30, 2026

TEHRIRE BHARAT

Her khabar sach ke sath

लखनऊ विश्वविद्यालय के एम.एड विद्यार्थियों ने जाना भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व

देहरादून,। लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा एम.एड. के विद्यार्थियों के लिए देश के पहले लेखक गांव में 25 जून 2026 को एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण में एम.एड. के छात्र-छात्राओं एवं विभाग के संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भ्रमण का नेतृत्व शिक्षाशास्त्र विभाग की प्रोफेसर एवं भ्रमण प्रभारी प्रो. किरण लता डंगवाल ने किया। उनके साथ विभाग के प्रो. सर्वण कुमार भी उपस्थित रहे। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने लेखक गांव परिसर में स्थित प्राचीन भगवान नरसिंह नागराजा मंदिर के दर्शन किए। इसके उपरांत उन्होंने ध्यान वाटिका में ध्यान एवं आत्मअनुभूति का अभ्यास किया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने लेखक गांव की ज्ञान-वाटिकाओंकृसंजीवनी वाटिका, नवग्रह वाटिका एवं नक्षत्र वाटिकाकृमें स्थापित औषधीय पौधों का अवलोकन किया तथा क्यूआर कोड के माध्यम से उनके औषधीय गुणों एवं उपयोगिता की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इसके बाद विद्यार्थियों ने लेखक गांव की आत्मा नालंदा पुस्तकालय एवं शोध एवं अनुसंधान केंद्र का अवलोकन किया, जहाँ 60,000 से अधिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। साथ ही विद्यार्थियों ने अटल प्रेक्षागृह का भी भ्रमण किया। इस संपूर्ण अनुभव के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, शोध संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों को निकटता से समझा। यह शैक्षणिक भ्रमण उनके लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अनुभवात्मक अधिगम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों की भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री, प्रख्यात साहित्यकार एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से आत्मीय भेंट एवं विस्तृत संवाद हुआ। डॉ. निशंक ने शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीतिदृ2020 के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, नवाचार, कौशल विकास और मानवीय मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने का एक व्यापक राष्ट्रीय संकल्प है।
उन्होंने कहा, “एक शिक्षक केवल विषय का अध्यापक नहीं होता, बल्कि वह समाज का निर्माता और राष्ट्र के भविष्य का शिल्पकार होता है। यदि शिक्षक संवेदनशील, शोधपरक और मूल्यनिष्ठ होगा, तो भारत का भविष्य भी उतना ही उज्ज्वल होगा।” उन्होंने भावी शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनात्मकता एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना विकसित करने तथा शिक्षा को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने का आह्वान किया। डॉ. निशंक ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए निरंतर अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार एवं नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
भ्रमण प्रभारी प्रो. किरण लता डंगवाल ने कहा कि, “शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर अनुभवात्मक शिक्षा से जोड़ना है। लेखक गांव जैसे प्रेरणादायी परिसर में साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण, शोध और शिक्षा के विविध आयामों को एक साथ देखने-समझने का अवसर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं शैक्षिक दृष्टिकोण को समृद्ध करता है। डॉ. रमेश पोखरियाल श्निशंकश् जैसे विद्वान व्यक्तित्व के साथ संवाद विद्यार्थियों के लिए जीवनभर प्रेरणा का स्रोत रहेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीतिदृ2020 अनुभवात्मक अधिगम, शोध, नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को विशेष महत्व देती है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को इन्हीं उद्देश्यों से जोड़ते हुए उन्हें संवेदनशील, दक्ष एवं उत्तरदायी शिक्षक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर प्रो. सर्वण कुमार ने कहा, “उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समग्र दृष्टिकोण, अनुसंधान की प्रवृत्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। लेखक गांव जैसा सृजनात्मक एवं प्रेरणादायी परिसर विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, साहित्य, शिक्षा और प्रकृति के समन्वित स्वरूप को समझने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण भावी शिक्षकों के व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें शिक्षा के व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हैं।”
भ्रमण में एम.एड. शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र-छात्राओं में जया तिवारी, जयप्रकाश सिंह, प्रतिज्ञा कनौजिया, सोनी पाल, शगुन साहू, शिल्पा तिवारी, आशुतोष सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने इस शैक्षणिक भ्रमण एवं डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के साथ हुए संवाद को अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए इसे अपने शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना।

news
Share
Share