window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); एसएचए की छापेमारी में योजना में संबद्ध अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाएं उजागर | T-Bharat
June 18, 2026

TEHRIRE BHARAT

Her khabar sach ke sath

एसएचए की छापेमारी में योजना में संबद्ध अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाएं उजागर

देहरादून,। आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) की छापेमारी में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डा. सरोज नैथानी के नेतृत्व में टीम ने पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। मरीजों से अवैध वसूली, बिना आवश्यकता आइसीयू में भर्ती, डाक्टरों की गैरमौजूदगी, खराब डायलिसिस सेवाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी खामियां मिलने पर प्राधिकरण ने प्रकाशदीप व पावरलाइफ अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की है। साथ ही प्रेमसुख व सुनंदाा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की भी संस्तुति की है। सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
पावरलाइफ अस्पताल में टीम को सामान्य वार्ड नहीं मिला। यहां छह बेड का एचडीयू और आठ बेड का आइसीयू संचालित होता मिला। टीम ने पाया कि घबराहट और उल्टी की शिकायत वाले एक मरीज को अनावश्यक रूप से आइसीयू में भर्ती रखा गया था। अस्पताल में टोल फ्री नंबर और सूचना-शिक्षा एवं संचार (आइईसी) सामग्री भी प्रदर्शित नहीं थी। आइसीयू की चार्टिंग अपडेट नहीं की गई थी, जबकि बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक पिछले तीन माह से नहीं भरी गई थी।
प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान के लाभार्थी से 48 हजार रुपये और अन्य मदों में छह हजार रुपये लेने की शिकायत मिली। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्री-आथराइजेशन में देरी, रैंप का अभाव और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पाई गई। अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित सूचना बोर्ड, टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री भी नहीं लगी थी। आपरेशन थिएटर की प्रभारी नर्स की जिम्मेदारी एक ओटी तकनीशियन निभाता मिला। इसके अलावा स्टाफ को मरीजों की भर्ती प्रक्रिया की भी पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
प्रकाशदीप अस्पताल की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई। यहां मरीजों से 85 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत मिली। अस्पताल का आइसीयू बेहद खराब स्थिति में मिला। दो गंभीर मरीजों को तत्काल इंदिरेश अस्पताल रेफर किया गया। निरीक्षण के दौरान एक भी उपचाररत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। मरीजों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से नियमित रूप से डाक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और उपचार केवल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध थी।
सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट की स्थिति बेहद खराब मिली। अस्पताल में वेंटिलेशन, रैंप और अग्नि निकास मार्ग नहीं मिला। डायलिसिस करा रहे मरीजों के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं थे। टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री का अभाव था। डायलिसिस के लिए उपयोग होने वाला आरओ सिस्टम भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। तीमारदारों के लिए बैठने और विश्राम की व्यवस्था भी नहीं थी।
वेलमेड अस्पताल में रैंप और जनजागरूकता सामग्री नहीं मिली। 140 बेड वाले अस्पताल में 100 मरीज भर्ती होने के बावजूद केवल छह आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और सात राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के मरीज मिले। जांच के दौरान अस्पताल में सिर्फ एक आरओ प्लांट संचालित मिला। बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक का रखरखाव भी संतोषजनक नहीं पाया गया। आपरेशन थिएटर के कल्चर परीक्षण की इन-हाउस रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।

news
Share
Share