window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ और सुदृढ़ बनाने में ‘‘जूडिशियम 2.0’’ महत्वपूर्ण पहलः मुख्यमंत्री | T-Bharat
July 22, 2026

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न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ और सुदृढ़ बनाने में ‘‘जूडिशियम 2.0’’ महत्वपूर्ण पहलः मुख्यमंत्री

देहरादून,। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यू.पी.ई.एस बिधौली में उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन ‘‘जूडिशियम 2.0-इंक्लूजन, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग’’ में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना सुशासन की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन की थीम समावेशिता, न्याय तक आसान पहुंच तथा न्यायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है, जो विकसित भारत के निर्माण के संकल्प से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर एवं सम्मान मिलना चाहिए तथा न्याय तक पहुंच में भौगोलिक अथवा आर्थिक परिस्थितियां बाधक नहीं बननी चाहिए। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को सरल एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है। न्याय में अनावश्यक विलंब से आमजन का विश्वास प्रभावित होता है, इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ ही समाज में विश्वास एवं सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर निर्भर करती है और न्यायाधीश इस दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के साथ-साथ ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया है। मुख्यमंत्री कहा कि राज्य सरकार भी न्यायालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। साथ ही राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून, दंगा रोधी कानून तथा भ्रष्टाचार एवं अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से उत्तराखंड में कानून के राज को और अधिक मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सभी नागरिकों को समान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में लागू समान नागरिक संहिता  एक ऐतिहासिक कदम है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ष्जूडिशियम 2.0ष् सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा विकसित एवं श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण के संकल्प को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उत्तराखण्ड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 05 करोड़ की धनराशि रखे जाने की घोषणा की तथा एसोशिएशन की स्मारिका का विमोचन भी किया। इस अवसर पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता, विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश एवं गणमान्य उपस्थित थे।

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