window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); स्पिक मैके ने देहरादून में नियाजी ब्रदर्स की सूफी कव्वाली प्रस्तुति आयोजित की | T-Bharat
September 21, 2026

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स्पिक मैके ने देहरादून में नियाजी ब्रदर्स की सूफी कव्वाली प्रस्तुति आयोजित की

देहरादून,। स्पिक मैके उत्तराखंड के तत्वावधान में प्रसिद्ध नियाज़ी ब्रदर्स ने देहरादून में अपनी भावपूर्ण कव्वाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह प्रस्तुतियाँ वेल्हम बॉयज़ स्कूल, एमकेपी कॉलेज, और वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में आयोजित की गईं। कलाकारों के साथ मुक़र्रम नियाज़ी और माजिद नियाज़ी ने कोरस में, वासिफ़ अहमद ने ढोलक पर तथा विजय कुमार ने तबले पर संगत दी।
वेल्हम बॉयज़ स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उत्साही उपस्थिति देखने को मिली। इस अवसर पर वैंटेज हॉल, वेल्हम गर्ल्स स्कूल और हिमज्योति के छात्र-छात्राएँ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सूफी संगीत की इस जीवंत परंपरा का आनंद लिया। प्रस्तुति में प्रसिद्ध रचना “छाप तिलक” को कबीर दास, बाबा फ़रीद, बाबा बुल्ले शाह और अमीर खुसरो की कविताओं के साथ खूबसूरती से पिरोया गया, जिसने युवा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।
नियाज़ी ब्रदर्स ने एमकेपी कॉलेज में भी प्रस्तुति दी, जहाँ उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को कव्वाली की समृद्ध परंपरा और इसके आध्यात्मिक दर्शन से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि हज़रत ख़्वाजा अजिमुद्दीन चिश्ती और हज़रत अमीर खुसरो इस सूफी संगीत परंपरा के अग्रदूत थे, जिसकी शुरुआत लगभग 900 वर्ष पहले हुई थी। प्रस्तुति की शुरुआत एक धर्मनिरपेक्ष भाव की कविता से हुई, जिसके बाद राग मिश्र देश में प्रभावशाली आलाप प्रस्तुत किया गया, और फिर अमीर खुसरो की रचना “ये री सखी” से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। वेल्हम बॉयज़ स्कूल की प्रिंसिपल संगीता काइन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “हमारे विद्यार्थियों के लिए नियाज़ी ब्रदर्स की इतनी समृद्ध कव्वाली प्रस्तुति का साक्षी बनना वास्तव में एक विशेष अनुभव था। ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की गहराई से परिचित कराते हैं। सीमाओं से परे जाकर जोड़ने वाला यह संगीत छात्रों को न केवल कलात्मक उत्कृष्टता का अनुभव कराता है, बल्कि सूफी काव्य में निहित सद्भाव और साझा विरासत के संदेश को भी समझने का अवसर देता है।”

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