window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-96526631-1'); दुष्कर्म के दोषी को अदालत से सुनाई 20 साल के कठोर कारावास की सजा | T-Bharat
January 29, 2026

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दुष्कर्म के दोषी को अदालत से सुनाई 20 साल के कठोर कारावास की सजा

देहरादून,। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने नाबालिग लड़की को बहला फैसला कर भगा ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले में दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी को 20 हजार रुपए का अर्थदंड और राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपए का प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल 2019 को पटेल नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 17 वर्षीय बेटी घर से सामान लेने निकली थी। लेकिन वापस घर नहीं लौटी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की, जिसमें सामने आया कि कुछ समय पहले उनके मकान में किराए पर रहने वाला सनी उर्फ सोनू नाबालिग को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था।
जांच में साफ हुआ कि वह (आरोपी) किशोरी को पहले हरिद्वार और फिर मेरठ ले गया और वहां उसने एक मंदिर में शादी का नाटक किया। उसके बाद दोनों गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित एक हॉस्टल में करीब सवा महीने तक पति-पत्नी के रूप में रहे। हॉस्टल संचालक मोहित शर्मा ने अदालत में गवाही दी कि उसने किशोरी को अपनी पत्नी बता कर कमरा किराए पर लिया था।
विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने बयानों से आंशिक रूप से मुकर गई और बचाव पक्ष के दबाव में कहा कि वह अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी। हालांकि, अदालत में स्कूल रिकॉर्ड टीसी और मेडिकल साक्ष्य के आधार पर यह माना की घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता है। जिसके बाद आरोपी सनी उर्फ सोनू निवासी हस्तिनापुर, मेरठ को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपए का अर्थदंड और राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपए का प्रतिकर देने का आदेश दियादजे गया है।

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