बैरक परिसर में मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने प्रमोद को टहलते हुए देखा था। पूछा, किस समय ड्यूटी पर जाना है। उन्होंने कहा- दो बजे जाएंगे, अभी इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद वह अचानक अपनी बैरक में चले गए। दोपहर सवा दो बजे पता चला कि प्रमोद की गोली लगने से मौत हो गई है।
ऐसे में वह वहीं पर टहलते हुए इंतजार करने लगे। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि प्रमोद को कभी ऐसे नहीं देखा था। वह शायद कुछ सोच रहे थे। उनसे पूछा भी गया कि क्यों टहल रहे हो तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि अब ड्यूटी का समय दो बजे हो गया है, इसलिए टाइम काट रहा हूं।
क्यों नहीं सुनाई दी गोली चलने की आवाज


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